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हाबिल ने कैसे जाना था, कि परमेश्वर को एक उपयुक्त बलिदान चढ़ाने के लिए क्या करना चाहिये?

अब ग्रीक भाषा में प्रकाशन के लिए "ऐपोकेलिप्स" (apocalypse) शब्द प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ "परदा उठाना" होता है। इस "परदा उठाये जाने" का शिल्पकार के उदाहरण में बड़ी ही सिद्धता से वर्णन किया गया है, किवह अपनी शिल्पकारी की कारीगरी पर से परदा उठा रहा होता है, उसे दर्शक के सम्मुख उघाड़ रहा होता है। यह तो उसको बेपरदा करना है, उसको उघाड़ा जाना है जो पहले से ही छुपा हुआ था। अब देखिए, यह उघाड़ा जाना न केवल मसीह के व्यक्तित्व का प्रकाशन है, अपितु यह तो आनेवाले सात कलीसियायी कालों में उसके भावी कार्यों का प्रकाशन है।

एक सच्चे विश्वासी को आत्मा के द्वारा मिले प्रकाशन की महत्ता को कभी भी नज़रान्दाज नहीं किया जा सकता है। प्रकाशन का महत्व तो आपके लिए शायद उससे कहीं अधिक है जितना कि आप समझते हैं। अब मैं प्रकाशितवाक्य की इस पुस्तक और आप के विषय में बातें नहीं कर रहा हूँ। मैं तो समस्त प्रकाशन के विषय में बातें कर रहा हूँ। यह एक कलीसिया के लिए अत्याधिक आवश्यक है। क्या आप को मत्ती 16 में वह स्मरण है, जहाँ यीशु ने अपने शिष्यों से यह प्रश्न पूछा था,

" लोग क्या कहते हैं कि मैं मनुष्य का पुत्र कौन हूँ?

और उन्होंने कहा था, कितने कहते हैं कि तू यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला है: कितने कहते हैं, तू एलिय्याह है; तथा दूसरे कहते हैं, तू यिर्मयाह, या भविष्यद्वक्ताओं में से कोई एक है।

उसने उन से कहा, परन्तु तुम क्या कहते हो, कि मैं कौन हूँ?

और पतरस ने उत्तर दिया और बोला, "तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।"

और यीशु ने उसे उत्तर दिया और कहा, "हे शमौन (बर-जोना) पतरस, तू धन्य है, क्योंकि माँस और लोहू ने नहीं, परन्तु मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है यह बात तुझ पर प्रकट की है।

और मैं तुझ से कहता हूँ, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर (चट्टान) पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा; और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।"

रोमन कैथोलिक कहते हैं, कि पतरस के ऊपर ही कलीसिया बनायी गयी थी। अब यह सचमुच में एक दिमागी उपज ही है। परमेश्वर कैसे एक कलीसिया एक ऐसे मनुष्य के ऊपर बना सकता था जो इतना अधिक अस्थिर था, कि उसने प्रभु यीशु का ही इन्कार कर दिया था, और ऐसा करते हुए उसने निन्दा करी थी? परमेश्वर अपनी कलीसिया किसी भी ऐसे मनुष्य पर नहीं बना सकता है जो पाप में ही जन्मा हो। और यह वहाँ पर पड़ी हुई कोई चट्टान भी नहीं थी, कि मानो परमेश्वर ने उस स्थान को पवित्र कर दिया हो। और यह ऐसा था ही नहीं जैसा कि प्रोटिस्टेन्ट कहते हैं, कि कलीसिया का निर्माण यीशु के ऊपर ही हुआ था। यह तो प्रकाशन ही था जिसके ऊपर कलीसिया का निर्माण हुआ था। इसे वैसा ही पढ़े जैसा यह लिखा हुआ है:"यह बात तुझ पर माँस और लोहू ने प्रकट नहीं की है, वरन मेरे पिता ने ही इसे तुझ पर प्रकट किया है, और मैं इस पत्थर (प्रकाशन) पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा।" कलीसिया का निर्माण तो प्रकाशन ही पर, "यहोवा यूँ कहता है पर ही हुआ है।

हाबिल ने कैसे जाना था, कि परमेश्वर को एक उपयुक्त बलिदान चढ़ाने के लिए क्या करना चाहिये? विश्वास के द्वारा ही उसने लोहू का प्रकाशन पाया था। कैन ने एक ऐसा प्रकाशन नहीं पाया था, (यद्यपि यहाँ तक कि उसे एक आज्ञा मिली थी), अतः वह एक उपयुक्त बलिदान नहीं चढ़ा सका था। यह तो परमेश्वर की ओर से आनेवाला प्रकाशन ही था जिसने अन्तर पैदा किया था, और हाबिल को अनन्त जीवन दिया था। अब हो सकता है, आप उसी बात को ही ग्रहण करें जो पादरी कहता है, या जिसकी सैमेनेरी शिक्षा देती है; और चाहे आपको इसकी शिक्षा वाक्पटुता से दी गयी हो, लेकिन जब तक परमेश्वर ही आप पर यह प्रकट नहीं कर देता है कि यीशु ही मसीह है; और यह लोहू ही है जो आपको शुद्ध करता है; और वही परमेश्वर आप का मुक्तिदाता है; तो आपके पास कदापि अनन्त जीवन नहीं होगा। यह तो आत्मिक प्रकाशन ही है जो ऐसा करता है।

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CAB-01 - यीशु मसीह का प्रकाशितवाक्य

एआई और केजेवी बाइबिल के माध्यम से आपके विश्वास को सशक्त बनाना।